Monday, January 26, 2009

नया ज़ख्म

लगता हैं कोई चोट अभी लगी है
नया
ज़ख्म कोई मिला है
कलम की धार पैनी
सफो से लहू टपक रहा है

आज आंख नम नही
स्याही सिसक रही
है
और लफ्ज़ दिल बन कर
कागज़ पर धड़क रहे है

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